शुक्रवार को उत्तरी कश्मीर के बारामूला जिले के सोपोर के वाटरगाम इलाके में एक पेट्रोल पंप के पास एक शॉपिंग कॉम्प्लेक्स की तीसरी मंजिल पर आग लग गई। इससे पूरे इलाके में अफरा-तफरी मच गई। घटना के तुरंत बाद, जम्मू-कश्मीर पुलिस, भारतीय सेना की 32 राष्ट्रीय राइफल्स, और जम्मू-कश्मीर फायर एंड इमरजेंसी सर्विसेज की टीमें मौके पर पहुंचीं और आग पर काबू पाने के लिए एक जॉइंट ऑपरेशन शुरू किया।
स्थानीय लोग भी बचाव के काम में शामिल हुए, आग बुझाने के काम में अधिकारियों की मदद की और आग को आस-पास की इमारतों तक फैलने से रोकने में मदद की। कॉम्प्लेक्स के पास एक पेट्रोल पंप होने की वजह से आग फैलने पर बड़ा नुकसान हो सकता था। ऐसे में स्थानीय लोगों की मदद से अनहोनी को टाला गया।
देश में आग लगने के कई मामले
पिछले कुछ महीनों में देश के अंदर कई बड़ी आग की घटनाएं हुई हैं, जिनमें जान-माल का काफी नुकसान हुआ है। ये घटनाएं मुख्य रूप से फायर सेफ्टी नॉर्म्स की अनदेखी, भीड़भाड़, इलेक्ट्रिकल शॉर्ट सर्किट, खराब एग्जिट रूट्स और लापरवाही के कारण होती रही हैं।3 जून को दिल्ली के मालवीय नगर में फ्लरिश स्टे नामक बेड-एंड-ब्रेकफास्ट/होटल में भीषण आग लग गई थी, जिसमें 21 लोगों की मौत हो गई थी। मृतकों में कई विदेशी नागरिक/मेडिकल टूरिस्ट शामिल थे। इमारत में फायर एनओसी नहीं था, एग्जिट रूट्स ब्लॉक थे और ओवर-क्राउडिंग थी। इस घटना में कई लोग घायल भी हुए थे। पीएम मोदी ने मृतकों के परिजनों को मुआवजे की घोषणा भी की थी।
लखनऊ में कई छात्रों की मौत
22 जून को लखनऊ में एक कोचिंग सेंटर आग लगी थी। अलीगंज इलाके में तीन मंजिला कमर्शियल बिल्डिंग में आग लगी थी, जिसमें एनिमेशन/गेमिंग कोचिंग, लाइब्रेरी हैं। इस घटना में 14-15 छात्रों की मौत हो गई। मृतकों में ज्यादातर 16-18 साल के थे। आग लगने के बाद छात्र खिड़कियों से कूदकर बचने की कोशिश कर रहे थे। इस घटना के बाद यूपी सरकार ने राज्यभर में कोचिंग सेंटर्स पर छापेमारी शुरू की।
मुजफ्फरपुर के अस्पताल में आग
जून के ही महीने में मुजफ्फरपुर में एक अस्पताल में आग लग गई थी। आग आईसीयू वार्ड में लगी थी। इसके बाद कर्मचारी भाग गए। परिजनों ने किसी तरह मरीजों की जान बचाई। इस हादसे में भी कई मरीजों की मौत हो गई थी। इससे पहले जनवरी के महीने में कोलकाता में एक रेस्टोरेंट में आग लग गई थी, जिसमें 16 लोगों की मौत हुई थी।
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